कुछ दोहे सृजन करने का प्रयास।

भजन करूॅं श्री राम के, राम चन्द्र के जाप।
जीवन को सुख दान दें,हरते दुख संताप।।

होली के त्योहार में, सजा रहे उन्माद।
दहन होलिका का दिखे, बचे भक्त प्रहलाद ।।

दान दया प्रभु राम की,देती रहे विकल्प।
समझ सकें जीवन सभी, बना करें संकल्प।।

सजी रहे प्रभु राम की, भक्ति मिटाती श्राप।
पार लगें भव के वही, जो करते प्रभु जाप।।

स्वरचित/मौलिक रचना।
एच. एस. चाहिल। बिलासपुर। (छ. ग.)

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