हिंदी!हमारी शान हो तुम,
हिंदी!हमारी जान हो।।
हे मातृभाषा! हे जननी!
तुम हीं मेरी पहचान हो ।
प्रियतम की प्रेयसी हो तुम।
झींगुर की झंकार हो ।।
गांव की माटी की खुशबू हो तुम।
मां का लाड़ – दुलार हो।।
स्वरचित
गोपाल कुमार पांडेय
Posted inpoetry
हिंदी!हमारी शान हो तुम,
हिंदी!हमारी जान हो।।
हे मातृभाषा! हे जननी!
तुम हीं मेरी पहचान हो ।
प्रियतम की प्रेयसी हो तुम।
झींगुर की झंकार हो ।।
गांव की माटी की खुशबू हो तुम।
मां का लाड़ – दुलार हो।।
स्वरचित
गोपाल कुमार पांडेय
Waah waah ati sunder umda 👌👌✍️✍️🌹🌹