मानवीय संस्कृति की पहचान है पर्यटन

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर सच्चिदानंद शिक्षा एवं समाज कल्याण संस्थान की ओर से आयोजित मानवीय ज्ञान में पर्यटन का अवदान विचार गोष्टी में भारतीय विरासत संगठन के अध्यक्ष साहित्यकार व इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि मानवीय ज्ञान में पर्यटन की महवपूर्ण भूमिका है । मानव जीवन में पर्यटन स्थलों का भ्रमण मानव संस्कृति की पहचान कराती है । प्राचीन काल में तीर्थाटन , भ्रमण एवं पर्यटन कहा गया है ।
विश्व पर्यटन दिवस प्रतिवर्ष 27 सितंबर को विश्व में मनाया जाता है । वर्ष 1980 से प्रतिवर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 1970 में संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन 27 सितंबर 1970 ई. में कानूनों को अपनाने की वर्षगाँठ के रूप में प्रथम बार 27 सितंबर 1980 ई. से विश्व पर्यटन दिवस मनाया है। विश्व पर्यटन दिवस में सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण में पर्यटन क्षेत्र की अनूठी भूमिका पर प्रकाश डालता है। भारत ने अतीत में कल्पित धन के कारण विदेशी यात्रियों को आकर्षित किया। चीनी बौद्ध धर्मनिष्ठ ह्वेनसांग की यात्रा है। तीर्थ यात्रा को बढ़ावा विशेषकर तब मिला जब अशोक और हर्ष सम्राटों ने तीर्थयात्रियों के लिये विश्रामगृह का निर्माण कार्य प्रारंभ किया था । भारत में 40 स्थल, विश्व विरासत सूची में 32 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित स्थल में बिहार का बोधगया का बौद्धि मंदिर और नालंदा विश्वविद्यालय शामिल हैं । धोलावीरा और रामप्पा मंदिर (तेलंगाना) विश्व धरोहर सूची में शामिल होने वाले स्थल हैं। पर्यटन योजना का प्रारंभ ब्रिटिश साम्राज्य का शैक्षणिक सलाहकार सर जॉन सार्जेंट ने 1945 ई. एवं मेलबर्न के थॉमस बुक ने थॉमस बुक एंड बुक की स्थापना 18 वीं सदी। में कर पर्यटन को बढ़ावा देने के कारण पर्यस्तन का जनक कहा गया है । बिहार में 14 प्रमुख एवं 160 पर्यटन स्थल है । मगध प्रमंडल का गया , बोधगया , उमगा , देव , अपसढ़ , दरियापुर पार्वती , पातालपुरी , ककोलत जलप्रपात , रूपौ , बराबर पर्वत समूह जहानबाद , करपी जगदम्बा स्थान , काको , धराउत , कौवाडोल , घेजन , देवकुंड आदि है । पर्यटन दिवस पर वक्ताओं में संस्थान के कार्यक्रम पदाधिकारी पप्पू कुमार , पी एन बी के सेवानिवृत्त पदाधिकारी सत्येन्द्र कुमार मिश्र आदि ने विचार व्यक्त किया ।

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