वक्त की हमेशा क़दर करना, यही समझदारी है – “निरेन कुमार सचदेवा”

वक्त को समझना समझदारी है। वक्त पर समझना ज़िम्मेदारी है…!!
सिर्फ़ रिश्तेदारों से ही नहीं, वक्त से भी हमे निभानी रिश्तेदारी है ।
वक्त के साथ हमे करनी सांझेदारी है।
कभी भी ना भूलना , वक्त की है हर शय ग़ुलाम।
अच्छा वक़्त ही बना सकता है हमारे बिगड़े काम।
और वक़्त महज़ माँगता है ये दाम।
कि उसकी करो कदर, फिर ख़ुशनुमा कट जाएगा ज़िन्दगी का सफ़र।
अगर बुरा वक़्त है, तो करना थोड़ा हौंसला।
अहम है कि जल्दबाज़ी में ना लेना कोई भी फ़ैंसला।
मायूसी भारी शामें, उदासी भरे दिन भी एक ना एक दिन ढल जाएँगे, ख़ुशनुमा सवेरे फिर आयेंगे।
यकीनन इश्क़ हो तो अकेले वक़्त नहीं गुज़रता।
और महबूबा की इंतज़ार में दिल भी कुछ ज़्यादा ही है धड़कता।
वक्त है सशक्त , ख़ुशहाली देखनी है तो बन जायो वक़्त के भक्त!
अज्ञानी है जो वक़्त तो देता है दोष।
ज्ञानी को मालूम है कि देर सवेर हो सकती है, लेकिन एक ना एक दिन वक्त कर देगा मदहोश!
अगर आज वक़्त तेरा है , तो क्या, कल मेरा भी होगा।
कभी भी ना कर अभिमान ऐ बंदे, हर किसी ने दुख और सुख, दोनों को है भोगा ।
मैं तो नतमस्तक होकर , वक्त के आगे झुकाता हूँ शीश।
यकीनन , फिर वक्त मेहरबान होगा, और मुझे देगा आशीष।
और एक अहम बात, वक्त को मैं नहीं कोसूँगा अगर जीवन में आएगी कोई मुश्किल।
करूँगा सब्र , निश्चित है कि लहरों को एक ना एक दिन मिल जाएगा साहिल।
लेखक निरेन कुमार सचदेवा
Be patient, trust Almighty God, even if you are going through bad times, things will definitely change for the better and good times will certainly come my dears.

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