मातृ शक्ति के बारे में कहा जग है कि:-
“संस्कारों की खाद से ही,आदर्श नागरिक बनते है।
अपने गुणों की रोशनी से,नाम समाज का करते है।।”
यह सनातन सच है कि अच्छे नागरिक माँ के दिए गए संस्कारों से बनते है।माँ ही प्रथम गुरु होती है।परिवार एक पाठशाला है,पाठशाला का हेडमास्टर माँ होती है।बच्चे को उठना,बैठना,बोलना व् आदर करना सब माँ सिखाती है।बच्चे के संस्कार ही उस परिवार की पहचान होती है।बच्चे सुसंस्कारवान होते होते है लोग उसका सारा श्रेय माँ को देते है और वे उस माँ के पियर पक्ष तक अपनी बात कह जाते है।
माँ के दिए हुए संस्कारों से बच्चे के भविष्य का निर्धारण होता है।पौधे को सिंचित करने के लिये मीठे पानी की जरुरत होती है उसी प्रकार बच्चों को संस्कारित करने के लिये अच्छे गुणों की जरुरत होती है।अच्छे गुणों का संस्कार माँ ही दे पाती है।
माँ की महत्ता को बताते हुए विश्व विजेता नेपोलियन बोनापार्ट ने अपने राष्ट्र फ़्रांस की जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि”you give me good mother,I give you good nation.”
“आप मुझे अच्छी माताये दो,मैं आपको अच्छा राष्ट्र दुँगा”।
यह शत प्रतिशत सत्य है।किसी भी समाज की उन्नति उस समाज की नारी शिक्षा पर निर्भर है,जिस समाज में नारी शिक्षा पर ज्यादा जोर है वह समाज उतना ही उन्नत है।
भारत के महान विचारक,पथप्रदर्शक,युगप्रवर्तक और युवा शक्ति के प्रेरणा पुंज स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि,”स्त्रियों की पूजा करके सभी जातियां बड़ी बनी है।जिस देश में ,जिस जाति में स्त्रियों की पूजा अर्थात मान-सम्मान नहीं, वह देश,वह जाति न कभी बड़ी बन सकी है और न कभी बड़ी बन सकेगी।स्त्रियों के शिक्षित होने से उनकी संतानों द्वारा देश का मुख उज्ज्वल होगा।किसी पक्षी का केवल एक पंख के सहारे उड़ना नितांत असंभव है।” हर भारतीय पुरुष को उक्त वाक्यांश के निहित भाव को समझना है और नारी शिक्षा के प्रति सोच को विस्तृत करने को प्राथमिकता देनी है। एक नारी की शिक्षा व उसके सम्मान से ही राष्ट्र का हित है।
आज अंतराष्ट्रीय महिला दिवस है,इस दिवस को हम यू ही औपचारिकता से न मनाए बल्कि संकल्प लेवे कि- हम अपनी -अपनी समाज में नारी को उसके खोए हुए गौरव व सम्मान दिलाने के लिए पूर्ण ईमानदारी से अपना दायित्व निभायेंगे और नारी शिक्षा के प्रचार-प्रसार में योगदान करेंगे।
आज महिला दिवस के अवसर पर एक सवाल मेरा अपनी महिला मित्रों व मातृ शक्ति से है कि आप सनातन संस्कृति के महान मूल्यों,प्रतिमानों और परम्पराओ की वाहिका हो,उसका दायित्व पूर्ण ईमानदारी से निभाए। नारी के लिए यह उचित है कि वे अपना गौरव और आदर बनाये रखने के लिए प्राचीन भारतीय नारियों के आदर्श को जाने और उनका युगानुकूल आचरण ईमानदारी से करें।नारियों को त्यागमयी वृति को अपनाना परम आवश्यक है।
पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण से अपने आपको बचाये और भारतीय संस्कृति के मानक मूल्यों से अपने जीवन को खुशहाल बनाये।
एक श्रेष्ठ नारी के श्रेष्ठ आचरण से घर स्वर्ग सम्मान हो जाता है।
कहा गया है कि:-
“पाक कला,शिशु पालन और
रखती घर का पूरा ध्यान।
ऐसे गुणों से परिपूर्ण नारी का,
घर होता है स्वर्ग सम्मान।।”
नारी पुरुष की प्रतिद्वंद्वी नहीं सच्ची सहचरी बनकर जीवन को खुशहाल बनाने का सर्वोत्तम प्रयास करे।
माँ भारती का सर्वत्र हो गौरवगान।
आओ,हम सब करें मातृ शक्ति का सम्मान।।
सभी वन्दनीय महिला मित्रों व मातृ शक्ति को महिला दिवस पर हमारा कोटिशः वन्दन-अभिनंदन,व महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं,हर हर महादेव ॐ नमः शिवाय सा।🙏अजय कुमारजैन*मरुधर टेक्सटाइल *श्री*बाजार विजयनगर🙏