बिन कुछ कहे ही बहुत कुछ कह जाती है ख़ामोशी , शर्त ये है कि छाई होनी चाहिए जुनूने इश्क़ की ख़ुमारी ।
बिन पिए ही क़दम लड़खड़ाने लगते हैं , छा जाती है मदहोशी , शर्त ये है कि छाई होनी चाहिए जुनूने इश्क़ की ख़ुमारी ।
बिना कारण ही ख़ून की रवानी में आ जाती है गर्मजोशी , शर्त ये है कि छाई होनी चाहिए जुनूने इश्क़ की ख़ुमारी ।
जुनूने इश्क़ में इंसान बाँवरों जैसी हरकतें करने लगता है , लेकिन उसे नहीं दे सकते हम दोषी क़रार , क्यूँकि उसके सर चढ़ चुका है अहसासे इश्क़ का बुखार ।
दिल की धड़कनें तेज़ होने लगती हैं , महसूस होने लगती हैं , शर्त ये है कि छाई होनी चाहिए जुनूने इश्क़ की ख़ुमारी ।
मौसम हो सर्दी का फिर भी बदन जलने लगता है , दिल मचलने लगता है , शर्त ये है कि छाई होनी चाहिए जुनूने इश्क़ की ख़ुमारी।
अजीब सी तड़पन , बेचैन मन , कभी ख़ुशी कभी ग़म , इश्क़ और मोहब्बत होते ही क्यूँ आ जाते हैं ऐसे बदलाव , आख़िर क्यूँ बदल जाते हैं आशिक़ के हाव भाव ?
जुनूने इश्क़ का अचूक बाण , कुछ इस तरह से करता है जिंदगानियों पर असर , फिर बहुत ही मधुर और आकर्षक लगने लगता है जीवन का ये सफ़र ।
दीवानगी , आवार्गी , इश्क़ होते ही बदल जाती है ज़िंदगी !
चारों तरफ़ छा जाता है मौसमे बहार , है करिश्मा , है अजूबा , एक तरह का जादू ही है ये अहसासे प्यार !
सोना भी फिर हो जाता है दुशवार , आते रहते है महबूबा के सपने , और आँख खुलने पर आशिक़ लगते हैं सजने सँवरने ।
क्यूँकि उन्हें होती है बेताबी , शब्दों में बयान करना है मुश्किल उस मधुर मिलन का अन्दाज़, अंजाम भी फिर बेहतरीन ही होगा , जब इतना ख़ूबसूरत है आग़ाज़ !
इश्क़ होते ही छा जाती है बेक़रारी , लाचारी लेकिन फिर भी ज़िंदगी लगने लगती है प्यारी , सब जानते हैं ये राज !

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