काकोरी डकैती काण्ड और असफाक का खत

नौ अगस्त, सौ साल हुए- फिरंगी साम्राज्य थर्राया।
काकोरी (लखनऊ)- रेलवे स्टेशन, घमासान छाया।                                                                           

ब्रिटिश हुकूमत पूरी तरह से हिली, इतिहास गवाह।
काकोरी ट्रेन डकैती, स्वर्ण अक्षरों में अंकित- वाह।

कहां हुई लूट की प्लानिंग, अशफाक उल्ला लिखा।
अशफाक, राम प्रसाद बिस्मिल; रोशन सिंह दिखा।

आर्य समाज मंदिर (शाहजहांपुर) प्लानिंग बनी थी।
१९ दिसंबर १९२७, तीनों को अलगा, फांसी दी थी।

शहीद अशफाक उल्ला खान प्रपौत्र अशफाक उल्ला।
राम प्रसाद बिस्मिल पंडित व अशफाक उल्ला मुल्ला।

अटूट दोस्ती की कसमें खाए, मिशनरी स्कूल में पढ़ते।
राम प्रसाद बिस्मिल पिता, आर्य समाज मंदिर में रहते।

बिस्मिल और अशफाक उल्ला खाते, एक ही थाली में।
जतन करें, आएं अंग्रेज़ों के बारूदी हथियार रे हाथों में।

अशफाक मित्र सचिन नाथ बख्शी की बहन को लिखा।
फलां दिन फैजाबाद कारा में फांसी होगी, चाहत लिखा।

मेरा शव लखनऊ रेलवे स्टेशन आए, मिलने तुम आओ।
सचिन नाथ बख्शी संग अशफाक की बहन कहलाओ।।

══╍★❀डॉ. कवि कुमार निर्मल ❀★╍══

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