बिजली,पानी,रोड,घर मिले,ये विकास आधार,गर कोई इनसे वंचित,ये तो लोकतन्त्र की हार…!!!
सारी दुनिया का सुख एक तरफ और…शक्ल से तो मैरिड नहीं लगते….सुनने का सुख एक तरफ…!!!
तेज़ धूप को जो दे रहे हैं लानतें,
पेड़ काटने से,वो कहाँ हैं मानते,
कैसी अजब,हवस और लालसा
काट जंगल,’गाइड’बनाईं इमारतें,
अब क्यों,बिलख बिलख रो रहा,
तुझ पर ही भारी,तेरे ही मुगालते!
अभी तो बीवी बर्तन साफ करने के लिये बुला रही है…बाद में आपको बताऊंगा कि बीवी को काबू में कैसे रखें…???
कुछ लोग मर कर याद आते हैं और…कुछ नहीं मर के…!!!
क्या खूब लिखा किसी ने- लोकतन्त्र में घुस गया…ढोंगतन्त्र का रोग…जितनी लम्बी होगी दण्डवत…उतना ज्यादा मोहनभोग…!!!
ज़मीर घोल स्याही में बस सियासत की वाहवाही लिख रहे हैं…खबरों की मन्डी में खबर कम है,बस जी हुजूरी का मोल ले रहे हैं…!!!
आदमी गलती का पुतला है…ऐसा लिखने वाले को भी पता था कि महिलाओं से तो कभी गलतीं हो ही नहीं सकती…!!
वो जो समझे थे तमाशा होगा… मैनें चुप रह कर बाजी पलट दी…!!!
बुरा वक्त पूछ कर नहीं आता…कई बार जज को भी वकील करने पड़ते हैं…!!!
कितनी अजब बात,आज तो
ऑक्सीजन के बाद इंटरनेट वह दूसरी चीज़…जिसकी कमी से इन्सान की साँसे फूलने लगतीं…!!!
एक अजीब सी हालत है तेरे जाने के बाद…भूख ही नहीं लगती,खाना खाने के बाद…!!!
हम तो यूँ ही चले जाते हैं,बिना मुँह धोये एग्ज़ाम देने और…लोग कहते हैं कि कमीना रात भर पढ़ के आया है…!!!
जो लोग मुझे पसन्द करते हैं उनका शुक्रिया…जो नहीं करते,मत करो, मैनें कौन सा चुनाव लड़ना है…??
बीवी,बॉस और मोदी में एक चीज़ कॉमन है…तीनों सिर्फ अपने मन की बात कहते हैं,हमारी तो सुनते ही नहीं…!!!
कुछ लोगों में कुत्ते वाले सारे गुण होते हैं…बस वफ़ादारी को छोड़ कर…!!!
मैं तुम्हें सारा दिन इतना डांटती हूँ, किसी काम में कमी न होने पर भी कोई और बहाना बना झिड़क देती हूँ पर फिर भी तुम कुछ भी नहीं कहते बस मुस्करा कर रह जाते हो,आखिर तुम्हारे अंदर इतना सब्र,सन्तोष,ठहराव कैसे है?- पत्नी जी के ये कहने पर मैं-शादी से पहले मैंने साड़ी के शो रूम पर तीन साल काम किया है, तुम्हारे जैसी रोज़ पिचहतर आती थीं दिमाग खाने…!!!
हमारे देश के नेताओं में देशभक्ति इतनी कूट कूट के भरी है कि… टिकट न मिली तो पार्टी बदल लेंगे पर…देशसेवा करके ही मानेंगे…!!!
अरे!कितनी देर और लगाओगी, पार्टी के लिये तो बहुत लेट हो गये- मेरे ये कहने पर पत्नी जी-चिल्लाना बन्द करो,एक घँटे से कह रही हूँ,पाँच मिनट में आई,समझ नहीं आता क्या..???
काम ऐसा करो कि लोग कहें…तू रहने दे,मैं कर लूँगा…!!!
मर्दों ने युद्ध जीता,धरती जीती, आसमां जीता,समुन्द्र जीता पर…औरतों ने मेकअप किया और मर्दों को ही जीत लिया…!!!
विवाहित पुरुषों की कोई लाइफस्टाइल नहीं होती…वो वाइफस्टाइल से जीते हैं…!!!
जब बारिश हो तो बाहर बैठा करो, किस्मत खुल जायेगी और…किस्मत न खुली तो क्या हुआ?…कितने दिनों से न धुली,शक्ल तो धुल जायेगी…!!!
वक्त बीतने के बाद अक्सर ये एहसास होता…वो लम्हा बेहतर था जो बीत गया…!!!
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