कोरोना आया तो डर चारों ओर,
भारतीय बोले – “चलो बजाएँ ढोल-ताशे जोर।”
थाली-ताली, दीये जलाए, 
डर को भी हमने मज़ाक बनाए।
ट्रंप चाचा मंच से गरज उठे,
“टैरिफ लगाऊँगा” – ऐसे बरस उठे।
भारत बोला – “चाय पियो प्याले में,
डर नहीं बिकता इस देश के हाले में।”
रूस-चीन संग भारत की यारी,
अब भारी पड़ी है डॉलर की सवारी।
चुनावी मंच पर चाचा चिल्लाते,
भीड़ मगर अब कम ही आते।
“Make America Great Again” का नारा,
लगता है बस चुनावी सहारा।
भारत कहे – “हम आत्मनिर्भर हैं,
जुगाड़ में सबसे अग्रसर हैं।”
टीवी डिबेट में एंकर गरजते,
दस पैनलिस्ट चीख-चीख मरते।
कोई बोले – “भारत जीत रहा”,
कोई कहे – “अमेरिका भी ठीक रहा।”
पर जनता हंसी – “ये कैसी कहानी?
सब अपनी-अपनी ढपली बजानी।”
टैरिफ, चुनाव और मीडिया का शोर,
व्यंग्य बना दुनिया की सबसे बड़ी डोर।
स्वरचित एवं भावपूर्ण
मुकेश “कविवर केशव” सुरेश रूनवाल