दीवाना मुझ सा नहीं,, रजनी प्रभा

सब चांदनी को तकते,मैं रात का दीवाना                                                                                            
महफ़िल सभी की जिद है,भाता मुझे वीराना
जो अपनो से खाए ठोकर,वो यार कैसे संभले
दर तो बदल ले लेकिन,मिलता कहां ठिकाना,,,,,,,
महफ़िल की जिद है,भाता मुझे वीराना 2

अश्कों को अपने अक्सर,बोतल से पीते हैं हम
सुनसान राहों पर अब,इस तरह जीते हैं हम,,,
लुटा है किसने तुझको,टूटा है यार क्यों तू
मयखाने पूछते हैं, क्या सुनाऊं मैं फसाना,,,
सब चांदनी को तकते,मैं रात का दीवाना
महफ़िल सभी की जिद है, भाता मुझे वीराना,,,,,,,!

 

तस्वीर दिल में जिसकी,तकदीर में नहीं वो                                                     
जो असर है बंदगी में,ज़ंजीर में नहीं वो,,2
उड़ने दिया उसे बस इतनी सी सिख देकर
चलना जरा सम्भल के,बड़ा खराब है जमाना,,,,
महफ़िल सभी की जिद है,भाता मुझे वीराना,,,

वो बेहद है खूबसूरत,उसकी यही खता है
मासूम है वो दिल का,मुझको तो ये पता है
जीना मै सीख लूंगा,मानूंगा हर कहा मैं,
आ जाए पास वो जो,करके कोई बहाना,,,
सब चांदनी को तकते,,,,,,,

1 Comment

  1. Dr GulabChand Patel

    क्या बात है बहुत खूब अभिनंदन

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