हे चंद्रघंटा मैया मेरी बस
इतनी सी विनती सुन लेना
तेरे दर से कोई खाली ना गया
मां चंद्रघंटा मेरा भाग्य जगा देना
नवरात्रि का तीसरा दिन है
मां चंद्रघंटा रूप तुम्हारा
माया में कहीं मैं भटक न जाऊं
तुम मेरी नैया पार लगा देना ।
मां तुम करती हो सिंह सवारी
मां तुम हो त्रिशूल सुदर्शन धारी
हे दस भुजाओं वाली माता
तेरी महिमा जग में बड़ी है न्यारी
तेरी शरण में आया हूं मैया
मेरे जीवन को महका देना
माया में कहीं मैं भटक न जाऊं
तुम मेरी नैया पार लगा देना ।
मां तुझ में है शिव की शक्ति
मां तुम बड़ी बलशाली हो
हाथों में तुम्हारे गदा , तलवार
मां तुम तो कमंडल वाली हो
रक्षा करती हो तुम भक्तों की
भक्तों के कष्टों को तुम हर लेना
माया में कहीं मैं भटक न जाऊं
तुम मेरी नैया पार लगा देना ।
लाल चुनर सजती घंटी बजती
तेरी आरती गूंजती है प्यारी
हे मैया आदिशक्ति चंद्रघंटा
हमने जीवन अपना तुम पर वारी
हमारे इस जीवन से मैया तुम
आज अंधेरा दूर भगा देना
माया में कहीं भटक न जाऊं
तुम मेरी नैया पार लगा देना ।
पं.पुरुषोत्तम शाकद्वीपीय”प्रेमी”, उदयपुर, राजस्थान