समझ नही आ रहा मुझे आज मै इतना उदास हूँ की बता नही सकता 2 दिन पहले की बात है मेरी दुकान के बाजू में मुस्लिम परिवार मे बेटी का जन्म हुआ मुझे पता चला तो मै बधाई देने चला गया और उनके परिवार से बोला की घर मे बेटी आई तो मुंह मीठा कारवाई जहाँ बेटी के जन्म होने पर लोगो को खुशी होती यहां माताम छा गया और बोले की किस बात की खुशी हमे बेटा चाहिए था बेटी हो गई मैने बहुत समझाया लेकिन समझने को तयार नही बोलते है की हमे बेटे की जरूरत थी ना की बेटी अब हमारा वारिस कोन होगा कैसे होगा कब होगा हमे ऐसा मालूम होता की हमारी बहु के कोख मे बेटी है तो हम कब का गिरा देते क्या बेटी माँ बाप की वारिस नही बन सकती बेटो से ज्यादा देख रेख नही कर सकती यही बात को ले कर मन मे बहुत सारे सवाल आ रहे और दुःख हो रहा है की आज कल लोग बेटी से ज्यादा बेटो को एहमियत दे रहे। आज मुझे बहुत दुःख है की यहां बेटी और बेटे को एक सामान का दर्जा मिलना चाहिए एक जैसा समझना चाहिए वैसा कुछ नही हो रहा अरे ये ये लोग कब समझेंगे की अगर बेटी नही होगी दुनियाँ मे तो हमे लड़की कोन देगा हमारे घर का चिराग कोन जलाएगा। मै अब कुछ नही बोल सकता आज बहुत दुखी हूँ मै

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