नवजीवन

मृतप्रायः थी धरा विनाश का मंजर चहुँओर था कायनात की करामाती कारगुजारी से नवजीवन संचारित हुआ कण-कण होते…

मेरे ख्वाब तो मेरे

मेरे ख़्वाब तो मेरे अपने हैं दिखते मुझको तेरे सपने हैं कहो तो ताजमहल बनवा दूं मिस्त्री कारीगर…

कब्र

निकल पड़ा मन दिल की सफर पर उसने दिल जुड़ने दिल टूटने की देखी दिल ने फ़िर मन…