आओ बच्चों, खेलें होली__ “बृजेश आनन्द राय,”

कितनी सुन्दर अपनी टोली,
आओ बच्चों, खेलें होली ।

पोपल-बाँस बनी पिचकारी
रंग-रंग मारी बौछारी
लल्लू, लल्लन, लल्ली, कारी
सबकी-अपनी शोभा न्यारी
परबतिया की छवि है भोली
आओ बच्चों, खेलें होली

आर्यन, आर्या, अंशू, अमरू
दाँत दिखाए कैसै जबरू
कौन अचानक रंग लगाया
देख बताए सबको झगड़ू
नन्हे-मुन्नों की हमजोली
आओ बच्चों, खेलें होली

कल्लू ने फिर किया तमाशा
टूट पड़ा है देख बताशा
मम्मी और मिठाई लाई
सब बच्चों ने मिलकर खाई
ड्योढ़ी आज बनी रंगोली
आओ बच्चों, खेलें होली

पानी ज्यादा, रंग है कम
हैं किन्तु न गोलू को कुछ गम
एक सेर है रबड़ी खाई
भोजनभट्ट ने किया हजम
पूड़ी पर फिर लगी है बोली

🖍️ बृजेश आनन्द राय, जौनपुर (उत्तर-प्रदेश)

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