
शीर्षक——-बेटी एक वरदान है——-
वो अपने बाप की इकलौती बेटी थी, और तेरे बाप ने दिया ही क्या है , ये ससुराल वाले कहते हैं , ये सुन मेरी आँखों से अथाह आँसू बहते हैं !
नादान समझते नहीं , कि हमने दिया है उन्हें अपने दिल का एक बेशक़ीमती टुकड़ा , एक ज़िंदादिल हँसता और मुस्कुराहता हुआ मुखड़ा !
बढ़े लाड प्यार से पली थी वो , वो छोटी से गुड़िया , इस घर की थी शान , हालाँकि वो थी बहुत शैतान , थी आफ़त की पुडिया ।
हमारी हर ख़ुशी , हमारी हँसी , हमारी ज़िंदगी अब है उनके आधीन , उनकी यह बात सुन कर हम हैं बहुत ग़मगीन ।
हमने उन्हें सौंपा है अपने घर का नूर , सुरूर , रुबाब , हमारे संसार कि थी वो नटखट जुगनी , थी हमारा उजियारा , हमारी रोशनी।
बहुत याद आती है बिटिया की , रोज़ सुबह उसने मुझे देना चाय का एक गर्म प्याला , वो समय भी था बहुत निराला !
उसके घर में होने से , घर में थी मस्ती , अब क्या है , उठने को मन ही नहीं करता , है सुस्ती ही सुस्ती ।
आख़िर कब ख़त्म होगा दहेज का ये व्यापार , आपकी सुशील बहू ही है आपके लिए सब से बड़ा उपहार ।
शादी , ब्याह , लगता है बन गए हैं अब एक तिजारत, इसलिए लगता है कि इस पापी कायनात का अन्त क़रीब है , जल्द आने वाली है क़यामत !
मूर्ख ससुराल वालो, बहू को स्नेह दो , प्यार दो , दो प्रेम और प्रीत , वो है अब आपके बेटे की मीत !
ऐसी गुणकारी बहू मिली है आपको , उसे इज़्ज़त दो , दो मान सम्मान , और सब मिलझुल कर गाओ ख़ुशी के गीत ।
ये बाबुल की इकलौती बेटी , ये अगर ससुराल में रही नाख़ुश , तो ये मेरा भी है प्रण !
मैं इन ससुराल वालों का अशांत कर दूँगा जीवन , बेटी की ख़ुशियों के लिए कर दूँगा मैं अपना जीवन समर्पण !
कवि———निरेन कुमार सचदेवा।
Daughters are angels 👼!!
I literally broke down while writing ✍️ these few lines !!