
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भारतीय हिंदी नववर्ष
भारत धरा बसंती बयार युक्त होकर,पूरा देश एक सूत्र है इस रोज़।
अवनि और अंबर हर्षित होकर, बह रही बयार सुगंधित इस रोज।
दशों दिशाएं पुलकित हैं, भारत भूमि के गीत गा रहीं इस रोज।
देख छटा इस पुण्य धरा की , प्रकृति श्रंगारित कर रही है देश इस रोज़।
जय जवान, जय किसान का नारा समृद्ध कर रहा भारत को इस रोज।
उत्तर-दक्षिण,पूरब-पश्चिम एकता के सूत्र में बांध रहा नव वर्ष इस रोज।
उत्साह, उमंग से तरंग उठाता, कर्त्तव्य बोध जगाता ये नव वर्ष इस रोज।
पुण्य धरा प्रत्येक घर में, धन-धान्य की खुशहाली लाती इस रोज।
भारत भूमि सतरंगी होकर, परिधान पहन हर्षाती इस रोज।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नव वर्ष, बयार हो जाती सुगंधित इस रोज।
बसंत बहार फागुनी रंग पाकर अवनिअंबर मुस्काता इस रोज़। स्वरचित कृति: शरीफ़ खान, रावतभाटा, कोटा, राजस्थान।