Posted inArticles poetry आज उसने-“डॉ विनोद कुमार शकुचंद्र” आज उसने,जाति को आस्था से जोड़ दियाएक धर्मात्मा ने,सबकी आंखों को फोड़ दिया सोच रहा हूं,क्या सोच कर… Posted by Rajni Prabha January 13, 2024
Posted inArticles सीता मां का चरित्र पर कविता लेखन-“शरीफ़ खान” वनवास की रातों में, सीता मां ने जलाई दीप,पतिव्रता का परिचय, है उनके चरित्र की श्रेष्ठ गीत। पुरुषार्थ… Posted by Rajni Prabha January 13, 2024
Posted inArticles जय श्री राधे कृष्णा-“निरेन कुमार सचदेवा” एक बार राधा जी ने कृष्ण से पूछा , ग़ुस्सा क्या है ?बहुत ख़ूबसूरत जवाब मिला , किसी… Posted by Rajni Prabha January 13, 2024
Posted inArticles हम सब अधूरे हैं-“निरेन कुमार सचदेवा” “ऐब” भी बहुत हैं मुझ में , और हैं “खूबियाँ” भी, हैं “कमियाँ” भी…….ढूँढने वाले तू सोच, तुझे… Posted by Rajni Prabha January 13, 2024
Posted inArticles इश्क़ अधूरा ही बेहतर है-“निरेन कुमार सचदेवा” एक मेरे अज़ीज़ भाई ने ये एक बेहतरीन व्यंग कसा है ज़िंदगी पे , मैंने कुछ और पक्तियाँ… Posted by Rajni Prabha January 13, 2024
Posted inArticles poetry मेरी हिन्दी-“प्रतिभा पाण्डेय” माथे पर बिन्दी सी सुसज्जित मेरी हिन्दी,मृदुभाषी,शर्मीली दुल्हन सी मेरी हिन्दी,हिन्दुस्तान की धरोहर मेरी हिन्दी,नित नूतन गति पर… Posted by Rajni Prabha January 10, 2024
Posted inArticles poetry मेरे राम-“पंडित अभय चौरे” विरोधी कहते हैं सारे राम मंदिर केजैसे गिराया था बाबरी मस्जिद कोमंदिर को हम सीधे बम से उड़ाएंगे… Posted by Rajni Prabha January 10, 2024
Posted inArticles आजकल की दुनिया बहुत निराली है-“निरेन कुमार सचदेवा” यहाँ बिकता है सब कुछ, ज़रा रहना संभल के——लोग हवा भी बेच देते हैं ग़ुब्बारों में balloon 🎈डाल… Posted by Rajni Prabha January 10, 2024
Posted inArticles चाँद सी महबूबा हो मेरी, कब ऐसा मैंने सोचा था-“निरेन कुमार सचदेवा” एक अज़ीज़ यार ने लिखा , नागरिकता तो तुम्हारी भी check होनी चाहिए , लगता है तुम चाँद… Posted by Rajni Prabha January 10, 2024
Posted inArticles वामिक जौनपुरी-“बृजेश आनन्द राय” 'भूका बंगाल' जैसी लम्बी कविता के रचयिता 'शैयद अहमद मुजतबा' प्रसिद्ध नाम 'वामिक जौनपुरी', 'मीना बाजार, चीखें, जरस,… Posted by Rajni Prabha January 10, 2024