पुरुष (कविता)

पुरुष (कविता)

कि उसने कभी देखा नहीं बारिश,धूप,सर्दी या बीमारी तत्पर रहा उस शक्स के लिय, जहां उसे लगी थोड़ी सी भी जरूरत मदद की।
इश्क़

इश्क़

जो बात तेरी और मेरी थी,, उस बात को जग ने जाना क्यों? जब मशहूर ही होना था तुझको,, तो बनता था मेरा दीवाना क्यों?
मां।

मां।

मेरे चेहरे की शिकन उसे परेशान कर देती है।2 वह मां ही है जनाब जो बच्चों पर अपनी जान दे देती है।।
मेरे हमसफर

मेरे हमसफर

सब खोकर जिसे पाना चाहे दिल,चाहत का वो अरमान हो तुम। दिल,जिगर,धड़कननही,मेरि तो अब जान हो तुम।।
पथ के प्रेमी (कविता)

पथ के प्रेमी (कविता)

हम आज के पथ के प्रेमी है, कल की हमको परवाह नही। अंगारों पे चल जायेगे, क्यूं मिलेगी हमको राह नही? है सोच नई,है सत्य नया,,,,                                  
शहर (कविता)

शहर (कविता)

न भाया शहर हमको तेरा,, रौशनी की न गुंजाइशे हैं,, हर तरफ सिर्फ छाया अंधेरा,,,
काश (कविता)

काश (कविता)

काश देख पाती कभी तुझे, जब तू थक कर लेटा हो मेरी आगोश में,, उस पल में और कोई न हो मैं,तुम और ये नीला आसमान हो।
ग़ज़ल

ग़ज़ल

ये  दर्द  दिल में जगा न होता अगर वो मुझसे ज़ुदा न होता।