मुग्धा -“आनन्द राय”

गली-गली ढूढ़ रही,बावरी सी भूल रही,मन जैसा कहीं कुछ,याद न दिलाइए । सुध-बुध खोय रही,बड़ी भली होय रही,बिखरे…