यह मोह है__”बृजेश आनन्द राय”

'इन्द्रधन्वा-दैवीय-रूपाभाऔरनिर्दोष मुस्कानों की श्वेत-श्यामरिमझिमी-बारिशसंगमरमरी पत्थरों सासदाबहार-काल्पनिक-उठानी-यौवनऔरलम्ब-काया काझूमता सागौनहृदय-हीन भावना-रहितमूर्तियों का मोहऔर जन्म-जन्मांतर केसम्बन्धों का एक-मात्र संस्कार' …जिन्दगी जला…

आओ बच्चों, खेलें होली__ “बृजेश आनन्द राय,”

कितनी सुन्दर अपनी टोली,आओ बच्चों, खेलें होली । पोपल-बाँस बनी पिचकारीरंग-रंग मारी बौछारीलल्लू, लल्लन, लल्ली, कारीसबकी-अपनी शोभा न्यारीपरबतिया…

ना पूछिए कितनी दुशवार है ये इश्क़ की नौकरी——- “कवि———निरेन कुमार सचदेवा।”

शीर्षक———सच्ची प्रीत सिर्फ़ एक बार होती है ——- ना पूछिए कितनी दुशवार है ये इश्क़ की नौकरी——-दिल तबादला…