Posted inghazal poetry shayari जो कंधे पर हाथ रखे और दिल हल्का हो जाए , उसे कहते हैं friend . “कवि——निरेन कुमार सचदेवा।” शीर्षक——-मुझे अपने दोस्त बहुत अज़ीज़ हैं——— जो कंधे पर हाथ रखे और दिल हल्का हो जाए , उसे… Posted by Rajni Prabha April 20, 2024
Posted inEvents poetry Press Note लाइफ की एकाउंट__ “हिमांशु पाठक हल्द्वानी नैनीताल उत्तराखंड” लाइफ की एकाउंट हिमांशु पाठककुछ शेष रही, कुछ खर्च हुई।लाईफ की केपिटल चेंज हुई।प्रोफिट एंड लोस एकाउंट देखा।ट्रेडिंग… Posted by Rajni Prabha April 20, 2024
Posted inghazal shayari कौन जज्बात दिल में सजाता नहीं। कौन इनको बनाके मिटाता नहीं।__ “एच. एस. चाहिल। बिलासपुर।” 🙏नमस्कार 🙏 २८-०३-२०२४/--------------------------------------------------/फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन२१२-२१२-२१२-२१२ कौन जज्बात दिल में सजाता नहीं।कौन इनको बनाके मिटाता नहीं। हर किसी… Posted by Rajni Prabha April 20, 2024
Posted inghazal poetry shayari धूप हमारे हिस्से की भी, हमें न मिली कभी।__”डा०अनिल गहलौत” धूप हमारे हिस्से की भी, हमें न मिली कभी।रही न अपने अधिकारों की क्यों बिलबिली कभी?? आगे बढ़कर… Posted by Rajni Prabha April 20, 2024
Posted inshayari मेरे सिवा भी कितने लोग तनहा है ,जो तनहाईयों से बातें करते हैं ।__ “लेखक——निरेन कुमार सचदेवा।” शीर्षक———इस टूटे दिल की पीड़ा सही ना जाये———!! मेरे सिवा भी कितने लोग तनहा है ,जो तनहाईयों से… Posted by Rajni Prabha April 18, 2024
Posted inghazal shayari आप आओ तो सजा लें,जिन्दगी की बहारें।__ “स्वरचित/मौलिक रचना।” आप आओ तो सजा लें,जिन्दगी की बहारें।वक्त खुद का हम सजाएं,तो यहीं होंगी बहारें। दिल खुदी मिटने न… Posted by Rajni Prabha April 18, 2024
Posted inghazal poetry shayari पंख बिन परवाज़ हर दिल प्यार से।पर रहे मोह्ताज भी इकरार से। एक ग़ज़ल लिखने का प्रयास। फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन२१२२-२१२२-२१२पंख बिन परवाज़ हर दिल प्यार से।पर रहे मोह्ताज भी इकरार… Posted by Rajni Prabha April 17, 2024
Posted inEvents ghazal poetry नारी जीवन की जननी है, यही तोशक्ति न्यारी है।__ ” शरीफ खान” नारी-शक्ति पर स्वनिर्मित रचना। नारी जीवन की जननी है, यही तोशक्ति न्यारी है।घोर विपत्ति,बाधाओं में भी,डर कर कभी… Posted by Rajni Prabha April 17, 2024
Posted inshayari ज़ख़्म हैं कि दिखते नहीं, मगर ये मत सोचिए कि दुखते नहीं … “कवि———निरेन कुमार सचदेवा।” शीर्षक——-प्यार का मरहम लगाने से सब ज़ख़्म भर जाते हैं——- ज़ख़्म हैं कि दिखते नहीं, मगर ये मत… Posted by Rajni Prabha April 17, 2024
Posted inghazal poetry shayari जहाँ तक हो सके जुड़े रहना बुजुर्गों से… “निरेन कुमार सचदेवा।” शीर्षक——बुजुर्गों का ऐहतराम कीजिए ——— जहाँ तक हो सके जुड़े रहना बुजुर्गों से…….चट्टानों से जुड़े पत्थर टूटते हैं… Posted by Rajni Prabha April 17, 2024