
देवालयों में शंख ध्वनि,
पुष्प गंध पूजा मंत्रोच्चार।
आतिशबाजी फुलझड़ी,
नव हर्ष नव वर्ष त्यौहार।।
चैत्र मास शुक्ल प्रतिपदा,
पावन हिंदू नव संवत्सर।
नव गंध नव उमंग नव रंग,
है प्रकृति नव रूप धर।।
नव वर्ष मनाने प्रकृति मानो,
धारण की नव परिधान।
हरे-भरे नव वर्ण-पल्लवित,
कुसुमित हुए बागान।।
पुण्य ग्रंथ देवों की वाणी ,
पावन हिंदू धर्म समातन।
विशाल देश देव संस्कृति,
सूर्य चंद्र नक्षत्र अनुसरण।।
ऋतु नया नव सुगंध बसंत,
समशीतोष्ण पवन परिवर्तन।
नव प्रकृति एहसास दिलाती,
नववर्ष का नव अवतरण।।
हिंदू नववर्ष की अनंत शुभकामनाएंँ।
जय श्रीराम
🙏🙏🙏
जुगेश चंद्र दास
कोसरंगी
रायपुर छत्तीसगढ़