शस्य श्यामला है धरा, हरित वर्ण चहुॅं ओर।
लहलाते सब खेत है, मधुर गंध हर छोर।।
पशुधन सुखमय बैठते, हर्षित सब नर नार।
शीतल जलमय ताल है, स्वर्ण सुनहरी भोर।।
विशाल वितान व्योम है,हरित धरा विस्तार।
हरी-भरी लहरा रही,चहुॅं दिश फसल कतार।।
ताल तलैया जल भरे, अन्न भरे खलिहान।
डगर-डगर मनभावनी,पुरवा पवन सितार।।
गेहूॅं मक्की बाजरा, और ज्वार जौ धान।
उगती फसलें खेंत में, हो हर्षित अभिमान।
तिल तिलहन सब फूलतें,गंध बहे हर छोर।
पावस ऋतु सुख दायिनी,पुलकित बैल किसान।
ललिता कश्यप जिला बिलासपुर हिमाचल प्रदेश