एक हृदय थे हम__
“बृजेश आनन्द राय”

एक हृदय थे हम
दो नहीं
एक मन-प्राण थे हम
दो नहीं
एक पूर्ण विचार थे
दो नहीं
एक साँस तार थे
दो नहीं
एक ही झंकार थे
भिन्न स्वर नहीं
रूठ गये तुम… टूट गये हम
कहाँ गईं वे अनुभूतियाँ…?
हम दो हो गए
हम हम ही रहे
लेकिन तुम तुम हो गए!
🖍️ बृजेश आनन्द राय, जौनपुर 6394806779
वाह क्या बात है!
प्धलकाशन धन्यवाद रजनी जी।