घर से बाहर भले आप जाया करो ।एक काजल का टीका लगाया करो ।।__””बृजमोहन””

घर से बाहर भले आप जाया करो ।
एक काजल का टीका लगाया करो ।।

लग न जाएं हमारी नज़र आपको ।
इस तरह से नज़र मत मिलाया करो ।।

दौर नफ़रत का है मशविरा मान लो ।
हर किसी को न अपना बनाया करो ।।

ये उदासी नहीं ठीक है आप पर ।
जब हो दिल को सुकूं मुस्कुराया करो ।।

इश्क़ की दास्तां है मुक़म्मल तभी ।
रोज रूठें भले वो मनाया करो ।।

क्या करें इश्क़ जो हो गया आपसे ।
नाज नखरें न इतने दिखाया करो ।।

प्रेम परिणय बना तो कभी वेदना ।
श्रेष्ठ दोनों है साथी बताया करो ।।

🌻🌻🌻1031🌻🌻🌻
बृजमोहन “साथी” डबरा ग्वालियर म.प्र. (मो.9981013061)

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *