सफल होने के लिए व्यवहार में बच्चा, काम में जवान और अनुभव में वृद्ध होना ज़रूरी है ।
एक अहम बात बताऊँ , हर अवस्था में मन का शुद्ध होना ज़रूरी है ।
व्यवहार में जो होगा बच्चा वो मन का होगा सच्चा ।
होगा भोला भाला , माँ की डाँट से थोड़ा बहुत डरने वाला ।
होगी सादगी भी , मासूमियत भी , होगा थोड़ा शरारती भी , थोड़ा नटखट भी , करता होगा हर काम झटपट भी ।
काम में होना चाहिए जवान , ऐसी स्थिति में चाहिए एक फ़ुर्तीला इंसान
है जवानी , तो ख़ून में भी होगी रवानी ।
इस वक़्त होंगी परिवार की जिम्मेदारियाँ , निभानी पड़ेंगी रिश्तेदारियाँ ।
पैसा कमाने की भी होगी चिंता, क्यूँकि वो अब बन चुका होगा एक पिता ।
और फिर जब आएगी बुढ़ापा , तब वो जान पाएगा अनुभव का महत्व , एक अनुभवी बाशिंदे का समाज में होता है बहुत ऊँचा अस्तित्व ।
लेकिन उम्र कोई भी हो, विचारों को रखना पाक और पवित्र , हमेशा बेदाग़ रखना अपना चरित्र ।
हर उम्र में चाहिए सच्चे और वफ़ादार मित्र ।
हर उम्र में वाणी में मिठास होनी चाहिए , आप बात करो तो ऐसे कि हवाओं में फैल जाए ख़ुशबू ए इत्र !
हर उम्र में अच्छा होना चाहिए आपका आचरण , फिर यक़ीनन आपको मिलेगा अपनापन !
एक बात सदैव रखना याद , हरेक की सलामती के लिए खुदा से करना फ़रियाद ।
आख़िर तो वो रचेता ही है इस दुनिया का रखवाला , निस्सन्देह सब की रक्षा करेगा वो कृष्ण मुरलीवाला !
कवि——-निरेन कुमार सचदेवा।

Posted inArticles poetry Short Story