
शीर्षक——-इंसानों से प्यार करो——-
जम के नाचा वो फ़क़ीर , मैंने तो इतना ही पूछा था कि ये ज़िंदगी है क्या ?
ये समझा दिया उसने , कि सिर्फ़ ज़िंदगी नहीं , उसे ज़िंदगी के प्रति बन्दगी है हाँ !
मानता हूँ कि दौलत का बहुत महत्व है जीवन में , लेकिन पैसे के आगे घुटने टेकना , शर्मिंदगी है , हाँ !
फ़ायदे बहुत हैं पैसे के , लेकिन इस नामुराद दौलत ने फैलाई हुई बहुत गंदगी है , हाँ !
फ़क़ीर हो या अमीर , ज़िन्दादिली ज़रूरी है, और ज़िंदा होना चाहिए ज़मीर !
पैसे को भगवान से ऊपर दर्जा देना , एक भारी ख़ता है , पैसे ने ही फैलाई हुई है दरिंदगी , क्या आपको ये पता है ?
ये सिक्कों की झनकार की तूफ़ानी है रफ़्तार !
ये तूफ़ान कर सकता है आपको तबाह , इस वास्तविकता के बहुत हैं गवाह ।
दिल तो सब का एक सा ही धड़कता है , कोई रईस हो या ग़रीब , हर जिस्म में है ख़ून की रवानी , ग़रीबों का भी होता है बचपन , उन पे भी आती है जवानी !
पैसे और ख़ुशियों का यक़ीनन नहीं है एक रिश्ता सीधा , कभी कभी पैसे भी ज़िंदगी को बना देता हैं पेचीदा !
तो यारो , मेहेरबानो , पैसे को उतनी ही अहमियत दो जिसके वो है क़ाबिल , सिर्फ़ दौलत होने से ख़ुशियों नहीं होतीं हैं हासिल !
और एक बात , कोई मुफ़लिस है या कोई राजा , ख़ुशियों पर हर इंसान का है भरपूर अधिकार ।
तो अज़ीज़ों , इस कायनात के हर कोने में फैला दो जज़्बाते प्रीत और प्यार !!
कवि———निरेन कुमार सचदेवा।
Love ❤️ mankind and not richness !!