इश्क़ ओ मोहब्बत भी अजीब शय हैं———

इश्क़ ओ मोहब्बत भी अजीब शय हैं———

जब वो पास होते हैं मेरे तो उन्हें जाने की जल्दी होती है ।
जब वो दूर होते हैं तो उन्हें मेरे पास आने की जल्दी होती है !
विडम्बना यही है कि रीति रिवाजों ने सब जिंदगानियों पर बुना हुआ है एक अजीब ओ ग़रीब जाल ।
मैं एक ऐसी कायनात में जीना चाहता हूँ जहाँ हर कोई करता हो प्यार , हर कोई देता हो प्यार की मिसाल !
एक ऐसी धरती , जहाँ मोहब्बत का बोल बाला हो , जहाँ हो राधा और कृष्ण जैसा गवाला हो ।
जहाँ वातावरण में फैली हो चंदन जैसी इश्क़ की महक , जहाँ ना चाहने पर भी , हर कोई जाए बहक़ ।
जहाँ प्रेम की बारिशें हों , जहाँ प्रेमियों की पूर्ण सब ख़्वाहिशें हों ।
एक ऐसी दुनिया जहाँ दो दिल मिल कर फिर कभी भी ना बिछड़ें ।
जहाँ हरियाली ही हरियाली हो , प्यार के बग़ीचे कभी भी ना उजड़ें ।
शायद आप सोच रहें हैं कि मेरा दिमाग़ हो गया है ख़राब , लगता है आप ठीक ही सोच रहें हैं जनाब ।
आजकल की दुनिया के बाशिंदे स्नेह और प्रीत को सिक्कों से हैं तोलते ।
ये नामुराद पैसा , इसके लिए सिर्फ़ अहसास क्या , ईमान भी हैं डोलते !!
या खुदा , एक मशवरा दूँ , या तो तूने सिर्फ़ इजात की होती दौलत ।
और अगर दौलत इजात की थी , फिर क्यूँ बनाई मोहब्बत ?
क्या इसीलिए बनाई मोहब्बत कि इंसान तुझ को हमेशा करें याद ?
और सच्चा प्यार पाने की लिए हाथ जोड़ तुझ से करते रहें फ़रियाद ?
मौला मेरे , लाचार प्रेमियों का हाल देखने तुझे इस संसार में आना ही पड़ेगा ।
परवरदीगार , तूने कहा था कि इस धरती पर सब ख़ुश रहेंगे , अब तुझे ये वादा निभाना ही पड़ेगा !!
कवि——निरेन कुमार सचदेवा।

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