भगवान के डाकियों की कोई कमी नहीं है,
हर कोई है डाकिया जो नमस्कार करता है।
प्रभु के संदेश को, पहुंचाता जन जन तक,
सारा संसार उनको दिल से प्यार करता है।
भगवान के डाकिए की………..
उनका हर संदेश पंजीकृत डाक से आता है,
कोई कागज नहीं, सबको राह दिखाता है।
ये डाकिए कोई खाकी वर्दी नहीं पहनते हैं,
पर हर द्वार पर स्वागत सत्कार होता है।
भगवान के डाकिए की…………
भगवान को है, अपने डाकिए पर विश्वास,
इस बात का होता हर डाकिए को एहसास।
हर डाकिया उनका आस्तिक होता जग में,
जो सबसे अपना जैसा व्यवहार करता है।
भगवान के डाकिए की………..
हर डाकिया होता है सच्चा और ईमानदार,
भगवान की भक्ति होती है उनका आधार।
कठिन से कठिन रास्ते आसान हो जाते हैं,
हर डाकिया, हर चुनौती स्वीकार करता है।
भगवान के डाकिए की…………
प्रमाणित किया जाता है कि यह रचना स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसका सर्वाधिकार कवि/कलमकार के पास सुरक्षित है।
सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,
जयनगर (मधुबनी) बिहार/
नासिक (महाराष्ट्र)