मेरे ख़्वाब तो मेरे अपने हैं
दिखते मुझको तेरे सपने हैं
कहो तो ताजमहल बनवा दूं
मिस्त्री कारीगर सब अपने हैं
जिंदगी दो दिन की है सजनी
दो कदम ही हमसाथ चलते हैं
फूल सा नाजुक ये दिल सनम
कभी तोडना मत बहुत डरते हैं
मुलाकात का सिलसिला कबतक
चलो सनम अब मुहब्बत करते हैं
तुम मेरी इबादत हो मेरीबंदगी हो
मेरी स्वास सांस तेरे साथ चलतेहैं
मैं गुलाब हूं कांटा नहीं ए हमदम
मेरे ख़्वाब बस तेरे साथ सजने हैं
डा गुलाब चंद पटेल
अहमदाबाद