ख़ुशियाँ फ़ैला कर देखिए———

ख़ुशियाँ फ़ैला कर देखिए———

छोटी छोटी धाराओं पर ही तो निर्भर है नदी का अस्तित्व , छोटी छोटी धाराओं का है अपना एक अलग महत्व !
छोटी बड़ी ईंटें लगाकर ही तो एक महान इमारत का होता है निर्माण ।
लेकिन अपने आप को ना जाने क्यूँ बहुत बड़ा सोचने लगता है ये मूर्ख इंसान ।
अरे नादानो , Alexander भी ख़ाली हाथ ही हुआ था इस दुनिया से रुकसत ।
जब तक साँसें चल रहीं हैं , तभी तक इस दौलत की है अहमियत ।
दो गज़ ज़मीन के नीचे , सिर्फ़ तुम्हारी नेकनामी ही तुम्हारे साथ जाएगी ।
ये रईसी , ये शान , ये शोहरत , तब कुछ भी ना काम आएगी ।
अभी भी वक़्त है, कर लो पुण्य के कुछ काम, थाम लो किसी मजबूर का हाथ।
देखो , कोई भी ना कहलाये इस दुनिया में अनाथ ।
कवि——निरेन कुमार सचदेवा।

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