कौन जज्बात दिल में सजाता नहीं। कौन इनको बनाके मिटाता नहीं।__ “एच. एस. चाहिल। बिलासपुर।”

🙏नमस्कार 🙏 २८-०३-२०२४/
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फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन
२१२-२१२-२१२-२१२

कौन जज्बात दिल में सजाता नहीं।
कौन इनको बनाके मिटाता नहीं।

हर किसी की बनी हसरतें दिल में ही
बिन जुबां का बना ये सुनाता नहीं।

दिल मुहब्बत करे और नफ़रत करे,
खुद समझ लो कभी ये दिखाता नही।

दूरियां में अगर दिल मिलाके रहें,
मान नजदीकियों के हटाता नहीं।

आप समझो चहल दिल के हालात को,
खुद बता दो मैं किससे निभाता नहीं।

स्वरचित/मौलिक रचना।
एच. एस. चाहिल। बिलासपुर। (छ. ग.)

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