बहुत याद आती है माँ———

बहुत याद आती है माँ———

आज Mother”s day है , इसीलिए मैं ये चंद पंक्तियाँ लिख रहा हूँ , मेरी माँ आज मेरे साथ नहीं है , बस हैं माँ की ख़ूबसूरत यादें , मेरी माँ को जन्नत बख्श्ना , परवरदीगार से करता हूँ निस दिन यही फ़रियादें ।
माँ की महानता का कुछ शब्दों में वर्णन करना , सिर्फ़ मुश्किल ही नहीं , है नामुमकिन , हज़ारों बार अपनी बिछड़ी माँ का स्मरण करता हूँ मैं हर दिन ।
माँ ज्ञान है , माँ ममता है , माँ क्षमता है , माँ एक करिश्मा है , इंसानों को दी हुई रब की सबसे महतवपूर्ण दुआ है ।
माँ एक अलंकार है , माँ के होने से हर पल होती जीवन में ख़ुशियों की अजब झंकार है।
जो हरदम प्यार से भरपूर रहता है , माँ वो संगीत है , सालों साल बाद भी जो मदमस्त कर दे माँ एक ऐसा गीत है ।
प्यार जिस में है अनंत , वो सागर है माँ , गुण हैं जिस में भरे हुए , वो गागर है माँ ।
माँ की गोद हर बालक के लिए है जन्नत , जिन की माँ उनके साथ है , उन्हें ज़रूरत नहीं कि वो मौला से माँगे कोई और मन्नत ।
दरियादिल है माँ , बहुत ख़ुशनसीब हैं वो , जिन्हें हासिल है माँ , जिनकी ज़िंदगी में शामिल है माँ ।
ईश्वर ऊपर है , इस कायनात में माँ धारण करती है ईश्वर का रूप , बहुत समझदार है माँ , उसे सब मालूम है कि औलाद की जीवन में कब होनी चाहिए छाया और कब होनी चाहिए धूप ।
यक़ीन मानिए , इबादत करता हूँ जब मैं खुदा की , और माँ को भी याद कर , उसे भी मैं पूजता हूँ , अह काश माँ तू देख पाती कि तुझ बिन मैं ज़िंदगी के कठिन पलों से कैसे झूझता हूँ !
ये क्या हुआ , अचानक आँसू हैं बहने लगे , कैसे रोकूँ इनको , आँखें हो गयीं है नम !
बस बहुत भावुक हो गया हूँ , अब और नहीं लिख पायूँगा , बस आख़िर में यही कहूँगा , कितनी भी तारीफ़ करूँ माँ की , होगी कम !!
कवि———निरेन कुमार सचदेवा।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *