मेघा – मेघा तू धरती पर
बरसा पानी दे।
संग में हम बच्चों को थोड़ी सी गुड़धानी दे।।
एक कहानी नानी से हम
सुन तो लेते पर।
राजा – रानी नहीं रहे हैं
अब इस धरती पर।।
हममें से तू बना किसी को
राजा – रानी दे।।
मेघा – मेघा तू धरती पर………..
झूमें नाचें गायें यहां पर
कुछ ऐसा करना।
आज धरा से अंबर तक मन
चाहे मन उड़ना।।
पंख लगाकर सौंप दे हमको
वो मनमानी दे।।
मेघा – मेघा तू धरती पर………..
सोंधी – सोंधी महक हवा की
बूंदें बादल की।
पैरों से मिट्टी मैं गूंथूं
कुछ पल दलदल की।।
अपने मन की कर पायें हम
इक नादानी दे।।
मेघा- मेघा तू धरती पर………….