महाराणा प्रताप पर कविता*।

महाराणा प्रताप पर कविता*।

वीरता का परिचय,महाराणा प्रताप, स्वाभिमान, गर्व का शाहकार ।

स्वाभिमान की उच्चता,अद्भुत शौर्य से किया अधीनता का प्रतिकार।

उनका अपूर्व साहस शौर्य और संघर्ष, अपूर्व और अद्वितीय।

शौर्य, पराक्रम से भरी हर डगर पर अद्भुत है उनकी वीर कहानी,

समर के मैदान में, चेतक घोड़े पर उनके संग्राम की निशानी।

सत्य, स्वाभिमान, प्रतिज्ञा,प्रण,प्रताप, वीर धरती के कर्मवीर।

निर्भय योद्धा, स्वाभिमानी रक्षक,सत्य के अजेय अमर वीर।

अमरता की झलक,वीरता, स्वाभिमान और दृढ़ संकल्प का माप।

देश के गर्व, शौर्य, पराक्रम और वीरता का प्रताप ।

वीर योद्धा महाराणा,धरती पर चमके उनके अपरमेय पुरूषार्थ के ताप।

मान-सम्मान के पुरुषार्थी,अद्भुत शौर्य के अभिनेता हमारे महाराणा प्रताप।

चित्तौड़ की रणभूमि में वीरता की अमर कहानी, निरंतर चली अपार उनकी विजय।

साहस, समर्थ और सामर्थ्य का प्रतीक, नही मानी पराधीनता।

अमर योद्धा, संकल्प , प्रताप,शक्ति, साहस का परिचय उनकी स्वाभिमानता।

विश्वास की दीप्ति से प्रेरित,निर्भय वीरता से दृढ़, न झुके उनके वीर स्वाभिमानी प्रेरक।

स्वराज के रक्षक, सत्य के प्रवर्तक,
महाराणा प्रताप, अमर, अजय रहें उनके संकल्प ।

द्वारा ::: शरीफ़ ख़ान, कोटा, राजस्थान।।

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