मतदाता___

मतदाता

इस देश के मतदाता
अक्ल के हैं दुश्मन
इनको समझा पाना
पत्थर पर दूब सा है जमाना।

ये जातीय आधार पर
आरक्षण आधार पर
धर्म आधार पर
गये हैं पूर्णतः बँट ।

चुनाव समय
योग्य अयोग्य उम्मीदवार न देख
आँख मूँद
इसी आधार पर
ये देते निज मत ।

राजनीतिक दल भी
इसी आधार पर
चुनाव काल
खड़ा करता
अपना उम्मीदवार
और जीतता चुनाव
भले ही उसका उम्मीदवार
क्यों न हो अयोग्य।

मतदाता
सब कुछ भूल
इसी आधार पर
हो जाते उसके संग
निकालते उसके लिए जुलूस
सर्वत्र टाँगते उसका ध्वज
चिपकाते उसका पोस्टर
माँगते घूम घूम वोट
बहाते खून
भले वह काम न करे कुछ।

धर्मदेव सिंह
प. बंगाल

1 Comment

  1. Kuldeep Singh

    मतदान जरूर करना चाहिए बहुत सुंदर लिखा

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