———————— तुम्हारी मसरूफियतें क्या कभी कम ना होंगी?
जब तुम्हें मिलेंगे फुर्सत के पल
तब जाने मैं इस दुनिया में होंऊगी या नहीं होऊंगी
लिख लिख कर प्रेम की पाती नज्में और गजल भर डाली मैंने कॉपियां सारी
जब कभी मिले तुम्हें फुर्सत तो परेशान ना होना
सोचकर मेरे बारे में खुद को खतावार ना समझना
यह केवल पातीऔर नगमें नहीं बातें हैं जो मैंने तुमसे की थी
यहां वहां हर जगह मिलेंगी तुम्हें वह बिखरी सी
यह सब लिखकर सुकून मिलता है मुझको
जिंदा रहेगा मेरा वजूद इनमें पढ़ लेना जब समय मिले तुमको
जारी रहेगी लगातार गुफ्तगू हमारी
जिंदगी रहे ना रहे पाती तो जिंदा रहेगी दुनिया में हमारी।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा