पापा की विदाई का दर्द, हृदय में गहरा घाव।
आंसू बहते रहते हैं, दर्द का नहीं मिटता नाव। 
एक हिस्सा हमारे अंदर, मर जाता है उनके साथ।
कोई दफनाने नहीं आता, जलाने नहीं आता हाथ।
उनकी यादें रह जाती हैं, हमारे दिल में बसी हुई।
उनकी मुस्कान, उनकी बातें, अब भी मेरे दिल में बसी हुई।
मैं जीता हूँ उनकी यादों में, उनकी यादें मेरे साथ हैं।
उनके बिना जीवन सूना है, अधूरा है हर पल का साथ।
पिता की चिता जल रही थी, पर आंसू बहते रहते हैं।
उनकी यादें रह जाती हैं, दिल को चीरती रहती हैं।
हर कोई अफसोस में है, न वो मिलने आएंगे।
बस यादें ही रह जाएंगी, उनके बिना जीवन सूना होगा।
पिता के बिना जीवन, सूना और अधूरा है।
उनकी यादें ही अब, मेरे साथ हैं, मेरे दिल में बसी हुई हैं।
उनकी विदाई का दर्द, कभी नहीं भूल सकता।
उनकी यादें मेरे साथ, हमेशा रहेंगी, कभी नहीं टूट सकती।
पिता की यादें रहेंगी, दिल में बसी हुई।
उनकी मुस्कान, उनकी बातें, अब भी मेरे दिल में बसी हुई।
उनके बिना जीवन, सूना और अधूरा है।
उनकी यादें ही अब, मेरे साथ हैं, मेरे दिल में बसी हुई हैं।
पिता की विदाई का दर्द, हृदय में गहरा घाव।
आंसू बहते रहते हैं, दर्द का नहीं मिटता नाव।
उनकी यादें रह जाती हैं, हमारे दिल में बसी हुई।
उनकी मुस्कान, उनकी बातें, अब भी मेरे दिल में बसी हुई।
पिता के बिना जीवन, सूना और अधूरा है।
उनकी यादें ही अब, मेरे साथ हैं, मेरे दिल में बसी हुई हैं।
उनकी विदाई का दर्द, कभी नहीं भूल सकता।
उनकी यादें मेरे साथ, हमेशा रहेंगी, कभी नहीं टूट सकती।
स्वरचित एवं भावपूर्ण
मुकेश “कविवर केशव” सुरेश रूनवाल