न जाओ,रुक जाओ!__ “बृजेश आनन्द राय,”

न जाओ,
रुक जाओ!
तुम रुक गई तो
‘जीवन’ यूँ ही नहीं बीत पाएगा…
बल्कि, ये अपना एक-एक पल
आत्मा द्वारा मन व प्राणों संग
अत्यंत सुकून से जी जाएगा !
प्रतिदिन सुबह होगी या साँझ होगी पर
ये दुनिया न एक पल को भी बाँझ होगी!
तुम्हारी आँखों से होकर
हर बसन्त और सावन हरियाला हरसेंगे!
तुम्हारे होठों पर से हो आने को कभी फाल्गुन तथा कभी चैता करषेंगे!
तुम्हारे माथे से छिरकेगी जेठ-अषाढ़ी-नमकीनी- बारिश… तुम्हारे केशो पर कभी हेमन्त तथा शिशिर के तुहिन-पाँव वर्तुल होंगे! और चेहरे से फिसलेगी शारद-कार्तिकी पूनो यात्रा।

🖍️बृजेश आनन्द राय, जौनपुर 6394806779

1 Comment

  1. Brijesh Anand rai

    वाह क्या बात है।
    धन्यवाद रजनी जी प्रकाशन के लिए।
    बृजेश आनन्द राय, जौनपुर।👏

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