मेरी सुबह तुम हो , और तुम ही शाम हो ,तुम ही दर्द हो , तुम ही आराम हो ।
मेरी दुआओ से आती है बस ये सदा , मेरी हो कर हमेशा रहना , कभी अलविदा ना कहना।
तुम रूठी रूठी सी लगती है , कोई तरकीब बता दो तुम्हें मनाने की , मैं ज़िंदगी गिरवी रख दूँगा , तू क़ीमत बता मुस्कुराने की ।
तू कहे तो आसमान से चाँद तारे तोड़ लायूँगा , हर ख़ुशी मैं तुझ पर लुटाऊँगा ।
तेरी नज़ाकत को मैं अपनी हक़ीक़त बनाना चाहता हूँ , तुझे देख कर बाँवरा लगने लगूँ , कुछ उस तरह से मुस्कुराना चाहता हूँ ।
मुझे सिर्फ़ इश्क़ नहीं है तुझ से , मेरे जज़्बात इश्के जुनूनियत की हद पार कर चुके हैं , दिल ओ जान से हम तुम पर मर चुके हैं ।
मेरी साँसों में तुम हो , धड़कनों में तुम हो , ख़्वाबों में तुम हो , सवालों में तुम हो , जवाबों में तुम हो ।
सब ऊँच्चाइयों में तुम हो , दिल की गहराइयों में तुम हो , आरजुओं में तुम हो , भावनाओं में तुम ,दुआओ में तुम हो ।
उम्मीदों में तुम हो , नज़ारों में तुम हो , ख़्वाहिशों में तुम हो , इशारों में तुम हो ।
जी रहा हूँ जिसके लिए वो सबब तुम हो , जिस के लिए आया हूँ मैं इस जहान में , क्या कहूँ मेरा रब अब तुम हो !
मेरी हसरत तुम हो , चाहत तुम हो , ईश्वर की मुझ पर की गयी इनायत तुम हो , मेरी पूजा तुम हो , मेरी इबादत तुम हो ।
तुम्हारे इश्क़ में मैं दीवानेपन की हद पार कर चुका हूँ , शायद अब मेरा जुनून एक पागलपन बन चुका है ,तुम्हारे अहसासों का क़ैदी अब मेरा मन बन चुका है ।
शुक्र अल्ला, तूने दिया है मुझे ये बेशक़ीमत तोहफ़ा , यक़ीनन बहुत मेहरबान है मुझ पर मेरा ख़ुदा !
तेरी बाहों में मेरा जिस्म खिल जाता है , सुकून जाता है मिल , मेरा जहान मस्त हो जाता है , छा जाती है हर ओर तिलस्माते झिलमिल ।
तूने मेरे रातों और दिनों को इंद्रधनुशी रंगों से भर दिया है , तूने मुझे सिर्फ़ आशिक़ नहीं , एक रसिक बना दिया है , आख़िरकार ये जादू तूने कैसे किया है ?
कवि———निरेन कुमार सचदेवा।

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