एक नारी के त्याग, समर्पण, सामर्थ्य और वात्सल्यता का प्रतीक अहोई अष्टमी व्रत नारी द्वारा अपनी संतति की सुख-समृद्धि, दीर्घायु एवं मंगल की कामना व संतान सुख प्राप्ति के लिए किया जाता है। एक स्त्री की संकल्प शक्ति से अनहोनी को भी होनी में बदलने वाले पर्व का नाम ही अहोई अष्टमी है। अहोई अर्थात जो आपके भाग्य में नहीं होना लिखा था उसको भी होनी में बदल देना, कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि पर रखे जाने वाले अहोई अष्टमी व्रत की महिमा है।
एक भारतीय नारी द्वारा माँ, बहन, पत्नी और पुत्री के रूप में सदैव निज सुखों को त्यागकर समर्पित भाव से अपना जीवन अपने परिवार के लिए जिया जाता है। भारतीय नारी अपने प्रत्येक रूप में अतुलनीय एवं वंदनीय है। आज समाज का भी प्रथम कर्तव्य है, कि आप बाप हों तो बेटी के लिए, भाई हों तो बहन के लिए, पति हों तो पत्नी के लिए और बच्चे हों तो माता-पिता के लिए उनके हितों, खुशियों व उनके मान-सम्मान की रक्षा का संकल्प अवश्य लें।