तुम जो मेरे सामने जब भी आती हो,
रजनीगंधा के पुष्प सी महकाती हो,
ना जाने क्या जादू किया है हम पर,
तुम्हारी खुशबू हमेशा ही बहकाती है।
सफेद और पतली सी है कमर तेरी,
रजनीगंधा पुष्प की सुगंध है फेरी,
क्या करें भला अपने इस दिल का,
तुम्हारी मोहब्बत ने ही इसे है घेरी।
भला कैसे कहें कैसा हाल है हमारा,
ध्यान तो तुम पर ही है हमारा सारा,
कहां से लाती हो यह मोहक खुशबू,
जिससे मैं हमेशा हूं बावला हो जाता।
कैसे कहे कितना करते हैं प्यार हम,
कहने के लिए नहीं है मेरे पास दम,
देखकर ही पढ़ लो ना चेहरा हमारा,
मोहब्बत नहीं होगी कभी भी कम।
उदय झा