…संत….मानता हूं वो ही संत, ज्ञान कौ न जामें अन्त,

…संत….
मानता हूं वो ही संत, ज्ञान कौ न जामें अन्त,
मात्र भगवंत जिन्हें प्राण तेऊ प्यारौ है।

छोड़ धन धाम जिन राम कौ लियौ है नाम,
राम अनुराग, काम-बाम को बिसारौ है।

राजनीति में निमग्न, राज्य की करें जो बात,
संत नहीं, ढोंगी मात्र संत रूप धारौ है।

पैसा धन लालच में धर्म की लई है आड़
‘ मोहन’ ने ऐसे कई संतों कों निहारौ है।

मोहन तोमर 'रिठौना'
अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश

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