मधुकर घूमे उपवन -उपवन ,सुंदर पाने रूप।
मचल- मचल कर नर्तन करता, स्याह चंचल अनूप।।
गुनगुन -गुनगुन गीत सुनाता, मधुर सुनावे तान।
सोई कलियॉं खिल उठती है, मनहर सजल विहान।।
बाहुपाश में आ पुष्पों के ,मिले नैन से नैन।
अंतरपट प्रफुल्लित हो गया, अद्भुत मिलता चैन।।
वायु सुवासित होकर बहती, हर्ष उठा उद्यान।
खग दल नित कलरव करते हैं , हृष्ट-पुष्ट वपुमान।।
रंग -बिरंगी कलियॉं झूमें ,कर सोलह शृंगार।
मधुरिम चंचल लोचन लोचे ,कंठ डाल कर हार।।
श्याम सलोना रस अधरों का ,करता पान पराग।
अंतस कुसुमित शीतल जाना ,पाया अटल सुहाग।।
ललिता कश्यप जिला बिलासपुर हिमाचल प्रदेश