शायरी लिखना इतना भी आसान नहीं__ “कवि——निरेन कुमार सचदेवा।”

शीर्षक———शायरी लिखना इतना भी आसान नहीं——-

शायरों की बस्ती में क़दम रखा तो जाना ग़मों की महफ़िल भी कितनी ख़ुशी से जमती है ।
शायरों की मौजूदगी होने पर हर महफ़िल गुणों से पनपती है ।
ये शायर हैं ऐसे अजीब ओ ग़रीब लोग , इनके कारण हर महफ़िल सजती है ।
ख़ुद ग़म सहते हैं , लेकिन ये शायर ख़ुशियों की बारिशें बरसातें हैं।
और ख़्वाहिशों की बूँदों में ख़ुद तो कम भीगते हैं, लेकिन औरों को बहुत भिगाते हैं।
ये शायरों के लिखे अफ़साने , ख़ुशनुमा बना देते हैं ज़माने !
इन्हें भगवान ने दिया है शब्दों की हेरा फेरी करने में माहिरी , और हम लोग इसे कहते हैं शायरी ।
इश्क़ ओ मोहब्बत की दास्तान , इनके लिए पन्नों पर उतारनी होती है बहुत आसान ।
शायरी होती है भावुक , मनमोहक , तभी तो इसे पढ़ने के लिए सब बाशिंदे होते हैं इच्छुक ।
जज़्बातों और अहसासों को ये ख़ूब नाच नचाते हैं ।
और ऐसा कर जिंदगानियों में तमन्नाओं और इच्छाओं का मिश्रण कर , उन्हें मदमस्त बनाते हैं ।
या खुदा , लम्बी उम्र दराज़ करना इन शायरों को , इनकी क़लम सदैव लिखती रहे, और फिर आशिक़ों की भावनाएँ मचलती रहें !
ये शायर लोग कुछ ऐसे होते हैं जनाब ,
इनके लिखे अल्फ़ाज़ दिलों में शोले भड़काते हैं ।
इसीलिए तो ये इतनी वाह वाही पाते हैं !!
कवि——निरेन कुमार सचदेवा।

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