सजल

सजल

हम न होंगे कभी, तब चलेगा पता।
आदमी तो गया, रह ग‌ए देवता।।

मौन निर्जीव सब, मूर्तियों-से खड़े।
अब न कोई दिखे, प्यार से देखता।।

एक था जो जिया, दूसरों के लिए।
जो सभी की कुशल, था सदा पूछता।।

वे हुए दूर जो, कल बहुत पास थे।
हम खड़े हैं वहीं, यह उन्हें दो बता।।

दिन ग‌ए जो उन्हें, कोसना व्यर्थ है।
आपने ही उन्हें, थी बता दी धता।
—डाॅ०अनिल गहलौत

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