वक्रतुंड महाकाय, विघ्न हरन सुखराय ।
रिद्धि-सिद्धि संग लीजिए, मंगल धाम बसाय ॥
लम्बोदर गजानन, मोदक प्रिय करुणानिधि ।
शुभ-लाभ संग आओ प्रभु, मुकेश घर में सिद्धि ॥
एकदंत दयामय, ज्ञान बुद्धि के दाता ।
संकट मोचक विघ्नहरन, शुभ भविष्य विधाता ॥
मूषक वाहन साथ में, करुणा वर्षा लाओ ।
भक्त मुकेश अरदास कर, बप्पा पधारो आओ ॥
गणनायक गम्भीर स्वर, सुख-समृद्धि बढ़ाओ ।
मंगल मूर्ति श्रीगणेश, हर हृदय जगमगाओ ॥
शिवनंदन गौरीसुत, त्रिविध सुख कर दाता ।
भवसागर से तारिए, पाप विनाशक त्राता ॥
स्वरचित एवं भावपूर्ण
मुकेश “कविवर केशव” सुरेश रूनवाल