शुभ वीरवार, आपका दिन मंगलमय हो ।

शौक़ नहीं हैं मुझे सरऐआम अपने जज़्बात लिखने का , मगर क्या करूँ तुम से बात करने का अब यही है ज़रिया ।
मैं शीरी फ़रहाद और लैला मजनू के क़िस्सों से वाक़िफ़ हूँ , तुझ से मिलने के लिए मैं पार करूँगा हर दरिया ।
सच्चा प्यार किया है मैंने , मुझे ख़ौफ़ नहीं है दुनिया वालों का , एक बार मिल तो सही मुझ से , जवाब दूँगा तेरे सब सवालों का ।
जज़्बात लिखें तो हैं मैंने , पर लिखें हैं अपने ख़ून से अपने दिल की किताब पर ।
अब सोच ले तू कैसे पढ़ेगी इन जज़्बातों को , क्यूँकि अब सब कुछ निर्भर करता है तेरे जवाब पर ।
एक बार मेरे दिल में झाँक कर तो देख , तेरा ही नाम लिखा है ख़ून के हर क़तरे पर ।
लड़ जायूँगा तेरे लिए मैं सारे आलम से , कितने भी हों ख़तरे , नहीं है कोई डर ।
क्यूँ नाराज़ है तू मुझ से , नासाज़ है तू मुझ से , तुझे कैसे मैं मनाऊँ , कैसे तुझे मैं दिल के रिसते घाव दिखाऊँ ?
दिल में भरें हुए हैं कई गमगीन सुरों के राग , बता दे कैसे तुझे मैं सुनाऊँ ?
लगता है सदियाँ बीत गयीं है , चैन से सोए हुए मुझे , अब और क्या तुझे मैं बताऊँ ?
तुझ से मिल नहीं पाया , तो अब इतना हूँ मायूस , अब तो आँसू भी गये हैं सूख , ना प्यास है ना भूख ।
अगर तूने बेवफ़ाई की तो यक़ीनन मैं मर जायूँगा , ज़्यादा वक़्त नहीं बचा है , आ कर मुझे मिल जा , नहीं तो फिर देखना आशिक़ी में मैं हद से गुज़र जायूँगा , ना जाने क्या कर जायूँगा !
आख़िर क्यूँ मरना चाहता हूँ मैं , क्या है मेरा दोष , मैं धमकी नहीं दे रहा , मर जायूँगा मैं निर्दोष ।
क्या प्यार करना जुर्म है , क्या है ये कोई पाप , सच्चा प्यार किया है मैंने , बस यही है मेरी ग़लती ।
मेरे साँसों की अब तू मालिक है, बता क्या है तेरी मर्ज़ी ?
भिखारी बन चुका हूँ मैं प्यार के ख़ातिर , क़िस्मत का क्या पता है , अगले जनम में तू बन जाए प्यार के लिए भिखारिन ?
मैं क़यामत तक इनतेज़ार करूँगा तेरा , आख़िरकर तुझे आना ही पड़ेगा मेरे पास , बन कर मेरी पुजारिन ।
तेरे बिन रहूँगा मैं बेज़ार , बेक़रार , अह काश कि तूने भी किया होता मुझ से दीवानों जैसा प्यार ।
तू माने या ना माने , बरक़रार रहेगी मेरी दीवानगी, मेरी आवर्गी , ओ पगली तू तो मेरे रोम रोम में है बसी !!
कवि——नीरेन कुमार सचदेवा 

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