
सुप्त सौन्दर्य
की नींद
और
भावनाओं का
उद्वेलन
तन्द्रा की
बेपरवाही
और
प्रतीक्षा का
जागरण
धैर्य-शक्ति का
परीक्षण
और
घुटन का
अवलम्बन
शून्यात्मक-
अभिव्यक्ति
और
हृदय का
तुमुलनाद
टीले की
रेत
और
सागर का
शोर
बहुत-कुछ
शान्त
हो गया
हर एक
ज्वार का
अन्त हो
गया
‘वह-मौसम’ भी
निश्चिन्त हो गया!
🖍️ बृजेश आनन्द राय, जौनपुर 6394806779