नाम सुनते ही चाय का,
स्वाद मुॅंह में आने लगता।
क्या कहने हैं चाय के?
कई प्रकार के स्वाद है इसके।
सबसे प्रसिद्ध दूध वाली चाय होती।
तलफगार है करोड़ों लोग चाय के।
बिना दूध के काली चाय ,
नींबू वाली चाय, अदरक डालकर पी जाती।।
स्वाद चाय का, एक बार
जब जिव्हा पर चढ़ जाता,
छुटता नहीं ,लाख कोशिशों बाद भी।
बनाने में जरा भी कम- ज्यादा होता,
शौकिनों को तुरंत समझ आ जाता।।
स्कूल , कॉलेज, दफ्तर के कैंटीन की चाय,
अच्छी -बुरी कैसी भी हो,
खप जाती है सारी।
पर घर बनी चाय,कुछ बिगड़ जाये, गर
बरसने पति महोदय लगते।।
बहुत निराले मिजा़ज चाय के।
पीते ही चुस्ती, फूर्ति, ताजगी,
तन -मन में है आ जाती।
सिर दर्द, भूख मिट जाती।।
चाय तो चाय है भाई।
खुद पियो और पिलाते रहो।
मौसम का मजा़ लेते रहो।।
चंद्रकला भरतिया
नागपुर महाराष्ट्र